Posts

Featured Post

तुझे कागज़ तो दिखाना होगा

या तो यहां से जाना होगा या तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जो यहीं के हो तो यहीं रहो  गर लांघ कर सरहद आए हो  तो बिस्तर बांध के जाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । हां तुझको दिखलाना होगा कागज़ तुझको दिखलाना होगा जो हम वतन हो तो दिल में बिठाएंगे साथ बैठ कर तुम्हारे सेवईयां भी खाएंगे रात के अंधेरों में छुपकर आने वाला बता वापिस कब रवाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा दिखाना होगा दिखाना होगा दिखाना होगा तुझको कागज़ तो दिखाना होगा म चंद कीड़ों को निकालने के लिए बीनने पड़ते हैं चावल सभी हमारे भात में कंकर बनने वालों  सरहद पार तेरा ठीकाना होगा । तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जो देश के रंग में रंग न सका तो रंगरेज़ कैसा धरा को मां कहने में इतना परहेज कैसा अब तो वंदे मातरम भी गाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जाने कितने भीतर तक  अम्न को तुमने कुतरा है । भाईचारे की दरियादिली का नशा  अब जाकर हमें भी उतरा है । देश को टुकड़ों में बांटने वालों को अब तो सबक सिखलाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जब गुलिस्तां को उजाड़ रहे थे सफेद लिबास वाले भेड़िये नायाब तब हम मौन नहीं थे । अपने बच्चों को हम...

वृंदावन की गलियां हो

सुन वृन्दावन सी गालियां हो  और तेरे संग रंगरलियां हो तेरी सांस की जलती भट्टी में इश्के दा पकवान जो तलियाँ हो जमना तट पर मिला करेंगे बंशी की धुन हम सुना करेंगें अपने प्रेम को देख देख कर सखियाँ सारी जलियाँ हो फूलों पर भंवरे ज्यों बैठे गालों से गेसू यूँ ऐंठे तेरी लटों को देख देखकर शर्माती सब कलियां हो वन उपवन हमने जब ढूंढा मुझे अनोखा पुष्प मिला जिसने ठुकराया तेरे इश्क़ को हाथों को अपने मालियाँ हो

पीर

कोमल सरल निर्मल हृदय समझो सबकी पीर सज्जन हेतु मलमल हो जाओ दुर्जन हेतू तीर कभी कर्कट फल बन जाओ कभी दुग्ध शर्करा खीर सेवा शुश्रूषा सहायता को जो रहते सदा अधीर कभी च्यक्षु में रक्त है  कभी झर झर बहता नीर 

ठाकुर

तलवार मुग़लों की  रक्त ठाकुर का भाला दुश्मन का छाती ठाकुर की दुश्मन सबका धड़ ठाकुर का  लड़ाई सबकी शव ठाकुर का  अनाथ बच्चे ठाकुर के विधवा ठाकुर की

इच्छा

इच्छा समस्त इच्छाओं को  मारने की इच्छा भी तो  एक इच्छा ही है यह इच्छा एक असंभव  इच्छा है । मेरी ये इच्छा है कि ये इच्छा मेरी इच्छा न हो  क्योंकि कुछ इच्छाएं  बड़ी अच्छी  इच्छा होती है  और वैसे भी इच्छाओं  से रहित मनुष्य एक अप्राकृतिक मनुष्य है इसलिए कुछ इच्छाएं रखना अच्छी बात है ।

एक सिपाही

एक सिपाही जब छुट्टी पर घर को आता है बूढ़ी मां का वो दिन उत्सव सा बन जाता है  संकट की घनघोर घटाएं उमड़ घुमड़ कर आती है तब वो सर पर बच्चों के छाता सा तन जाता है

कर्मों का कागज़

अहंकार के सब पहाड़ यहां ढह गए समय के बहाव में बड़े बड़े बह गए  इक दिन तुमको भी वापस जाना होगा  वहां कर्मों का कागज़ तो दिखाना होगा छोड़ दे तू अपने बच पाने की उम्मीदें नेकी बदी की यहीं कट जाती है रसीदें उन रसीदों का मिलान भी कराना होगा वहां कर्मों का कागज़ तो दिखाना होगा

कविता पढ़

वेदना से पढ़  संवेदना से पढ़ मुस्कुराकर पढ़  खिलखिलाकर पढ़ नज़र से पढ़ नज़रिए से पढ़ प्यास में पढ़ भूख में पढ़ आकुलता में पढ़ व्याकुलता में पढ़ भय में पढ़ निर्भय हो कर पढ़ रोष में पढ़ आक्रोश में पढ़ जय में पढ़  पराजय में पढ़ तुलसी को पढ़ मीरा को पढ़ रसखान या  कबीरा को पढ़ अकेलेपन में पढ़ भीड़ में पढ़ बाहर तूफ़ां हो तो नीड़ में पढ़ विरह में पढ़ मिलन में पढ़ युद्ध में पढ़ शांति में पढ़ जब भी हृदह हो अधीर तब कोई कविता पढ़