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तुझे कागज़ तो दिखाना होगा

या तो यहां से जाना होगा या तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जो यहीं के हो तो यहीं रहो  गर लांघ कर सरहद आए हो  तो बिस्तर बांध के जाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । हां तुझको दिखलाना होगा कागज़ तुझको दिखलाना होगा जो हम वतन हो तो दिल में बिठाएंगे साथ बैठ कर तुम्हारे सेवईयां भी खाएंगे रात के अंधेरों में छुपकर आने वाला बता वापिस कब रवाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा दिखाना होगा दिखाना होगा दिखाना होगा तुझको कागज़ तो दिखाना होगा म चंद कीड़ों को निकालने के लिए बीनने पड़ते हैं चावल सभी हमारे भात में कंकर बनने वालों  सरहद पार तेरा ठीकाना होगा । तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जो देश के रंग में रंग न सका तो रंगरेज़ कैसा धरा को मां कहने में इतना परहेज कैसा अब तो वंदे मातरम भी गाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जाने कितने भीतर तक  अम्न को तुमने कुतरा है । भाईचारे की दरियादिली का नशा  अब जाकर हमें भी उतरा है । देश को टुकड़ों में बांटने वालों को अब तो सबक सिखलाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जब गुलिस्तां को उजाड़ रहे थे सफेद लिबास वाले भेड़िये नायाब तब हम मौन नहीं थे । अपने बच्चों को हम...

स्त्री 2

विवाह से पहले गर्म रोटियां खाती है स्त्री  विवाह के बाद गर्म रोटियां बस खिलाती है स्त्री विवाह से पहले अपने घर जाती है स्त्री विवाह के बाद पीहर जाती है स्त्री वही सोफे वही कमरा वही मां वही भाई  वही खिलोने वही पलंग वही दीवारें  वही दरवाजे वही पड़ोसी फिर  क्यों वो  घर पीहर हो जाता है  अपने ही घर की मेहमान हो जाती है स्त्री

स्त्री

इस प्रश्न का उत्तर मैं भी  ढूंढ रहा हूँ तुम भी ढूंढों वही सिगरेट वही धुआं  वही तम्बाकू वही निकोटिन मगर असर इतना अलग क्यों   जब पुरुष सिगरेट पीता है तो  फेफड़े खराब होते हैं । परंतु जब स्त्री सिगरेट पिये तो  चरित्र खराब होता है । शायद पुरुष का चरित्र लोहे का  और स्त्री का चरित्र मोम का हो  स्त्री के फेफड़े लोहे के और  पुरुष के फेफड़े मोम के होते होंगे न । इस प्रश्न का उत्तर मैं भी  ढूंढ रहा हूँ तुम भी ढूंढों

चिराग

हर अंधेरे कमरों को रोशनी बांट देता है चरागों की जात बिरादरी नहीं होती ।

कारावास

ये जो मेरे  मुल्क के  गद्दार  नेता है जिन्होंने मां भारती का गला रेता है जिन्हें मिलना चाहिए था कारावास उन्हें मिल रहा है कार और आवास

वीथिका बन जाऊं

समय हुआ  कुछ टहनियों के  वृक्ष से बिछड़ने का किंतु शोक नहीं  तिल तिल धूप में जलने से अच्छा सूख कर  ठूंठ बनने से अच्छा कुल्हाड़ी की मूंठ बनने से अच्छा वीथिका बन हवनकुंड में  आहुति कहलाऊँ दे दूं अग्नि को आकार  हो जाए  किसी की  कामनाएं स्वीकार ।

कोख में

कोई कोख में क्यों न मारे लड़कियों को  तुम्हारे देश में  यहां भेड़िए घूमते रहते हो पुरुषों के भेष में 

कुछ नहीं दिखता

सच कहूं  तू जहां तक मुझे दिखता है । वहां तक मुझे कुछ भी नहीं दिखता है । रुक जाए तो भूले से दफ़न न करना , टूटा दिल  ऊंची कीमत पर बिकता है । पहले सा टिकाऊपन नहीं रहा चीजों में इश्क़ ज्यादा दिन अब कहाँ टिकता है ।