पीर

कोमल सरल निर्मल हृदय
समझो सबकी पीर

सज्जन हेतु मलमल हो जाओ
दुर्जन हेतू तीर

कभी कर्कट फल बन जाओ
कभी दुग्ध शर्करा खीर

सेवा शुश्रूषा सहायता को
जो रहते सदा अधीर

कभी च्यक्षु में रक्त है 
कभी झर झर बहता नीर 




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