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Showing posts from May, 2026

कुछ नहीं दिखता

सच कहूं  तू जहां तक मुझे दिखता है । वहां तक मुझे कुछ भी नहीं दिखता है । रुक जाए तो भूले से दफ़न न करना , टूटा दिल  ऊंची कीमत पर बिकता है । पहले सा टिकाऊपन नहीं रहा चीजों में इश्क़ ज्यादा दिन अब कहाँ टिकता है ।

वृंदावन की गलियां हो

सुन वृन्दावन सी गालियां हो  और तेरे संग रंगरलियां हो तेरी सांस की जलती भट्टी में इश्के दा पकवान जो तलियाँ हो जमना तट पर मिला करेंगे बंशी की धुन हम सुना करेंगें अपने प्रेम को देख देख कर सखियाँ सारी जलियाँ हो फूलों पर भंवरे ज्यों बैठे गालों से गेसू यूँ ऐंठे तेरी लटों को देख देखकर शर्माती सब कलियां हो वन उपवन हमने जब ढूंढा मुझे अनोखा पुष्प मिला जिसने ठुकराया तेरे इश्क़ को हाथों को अपने मालियाँ हो

पीर

कोमल सरल निर्मल हृदय समझो सबकी पीर सज्जन हेतु मलमल हो जाओ दुर्जन हेतू तीर कभी कर्कट फल बन जाओ कभी दुग्ध शर्करा खीर सेवा शुश्रूषा सहायता को जो रहते सदा अधीर कभी च्यक्षु में रक्त है  कभी झर झर बहता नीर