वृंदावन की गलियां हो
सुन वृन्दावन सी गालियां हो
और तेरे संग रंगरलियां हो
तेरी सांस की जलती भट्टी में
इश्के दा पकवान जो तलियाँ हो
जमना तट पर मिला करेंगे
बंशी की धुन हम सुना करेंगें
अपने प्रेम को देख देख कर
सखियाँ सारी जलियाँ हो
फूलों पर भंवरे ज्यों बैठे
गालों से गेसू यूँ ऐंठे
तेरी लटों को देख देखकर
शर्माती सब कलियां हो
वन उपवन हमने जब ढूंढा
मुझे अनोखा पुष्प मिला
जिसने ठुकराया तेरे इश्क़ को
हाथों को अपने मालियाँ हो
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