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तुझे कागज़ तो दिखाना होगा

या तो यहां से जाना होगा या तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जो यहीं के हो तो यहीं रहो  गर लांघ कर सरहद आए हो  तो बिस्तर बांध के जाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । हां तुझको दिखलाना होगा कागज़ तुझको दिखलाना होगा जो हम वतन हो तो दिल में बिठाएंगे साथ बैठ कर तुम्हारे सेवईयां भी खाएंगे रात के अंधेरों में छुपकर आने वाला बता वापिस कब रवाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा दिखाना होगा दिखाना होगा दिखाना होगा तुझको कागज़ तो दिखाना होगा म चंद कीड़ों को निकालने के लिए बीनने पड़ते हैं चावल सभी हमारे भात में कंकर बनने वालों  सरहद पार तेरा ठीकाना होगा । तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जो देश के रंग में रंग न सका तो रंगरेज़ कैसा धरा को मां कहने में इतना परहेज कैसा अब तो वंदे मातरम भी गाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जाने कितने भीतर तक  अम्न को तुमने कुतरा है । भाईचारे की दरियादिली का नशा  अब जाकर हमें भी उतरा है । देश को टुकड़ों में बांटने वालों को अब तो सबक सिखलाना होगा तुझे कागज़ तो दिखाना होगा । जब गुलिस्तां को उजाड़ रहे थे सफेद लिबास वाले भेड़िये नायाब तब हम मौन नहीं थे । अपने बच्चों को हम...

जनरेशन गैप

तुम यो यो वाली जनरेशन हो  हम यूँ यूँ वाली पीढ़ी है  तुम चढ़ते सीधा आसमान  हम बढ़ते सीढ़ी सीढ़ी है  या तो आ जाओ तुम यहां या हमको ले लो अपने संग में हैम भी खुद को रंगना चाहते हैं नई दुनिया के इस रंग में तुम फ़ास्ट फ़ूड की जनरेशन हो हम दलिया खिचड़ी वाले हैं तुम पॉप रैप वाले हो हम भजनों के मतवाले हैं 

आखिर क्यों माने ईश्वर को

आखिर क्यों माने ईश्वर को ? जरूर पढ़ें  मनोज चाण्डक "नायाब"  9859913535 📞 आइये आज बिना किसी धार्मिक ग्रंथ अथवा पुस्तक को आधार बनाते हुए बिना किसी धर्म मज़हब की पूर्व निर्धारित मान्यताओं को केंद्र में रखते हुए एक सामान्य बुद्धि के व्यक्ति की तरह आज हम ईश्वर पर विवेचना करते हैं ।    ईश्वर है अथवा नहीं है इस विषय पर बहस सदियों से नहीं युगों युगों से होती आ रही है क्योंकि ईश्वर है इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है तो ईश्वर नहीं है इसका भी तो कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है । ईश्वर को प्रमाणित करने वालों के पास अपने कई तर्क है वैसे ही ईश्वर नहीं है ऐसा कहने वालों के पास भी अपने तर्क है अब प्रश्न है कि ऐसे में क्या किया जाए  इसलिए मानने वाले मानें न मानने वाले न माने परंतु निर्णय लेने का यह सबसे व्यवहारिक तरीका है कि ईश्वर को मानने से क्या नुकसान है और क्या फायदे हैं इस पर विवेचना की जाए , ईश्वर की सत्ता को मानने से बीस फायदे मैं गिनवा सकता हूँ मगर कोई ईश्वर को मानने से  कोई एक नुकसान मुझे गिनवा दें शायद नहीं गिनवा सकते तो फिर क्यों न ईश्वर में आस्था रखी जाए । ईश्वर क...

डीपी को ज़ूम करके

मैं जानता हूँ तुमने देखा था  उस दिन मॉल में मुझे घूम करके । में ये भी जानता हूँ तुम रख देती हो,   किताब में मेरी तस्वीर चुम करके । काश की कोई ऐसा फीचर होता तो  मैं भी जान लेता , की तुम देखा करती हो कितनी बार मेरी डीपी को ज़ूम कर कर के ।

राजस्थानी गीत

( 1) मनडे रे तपते धोरां माइ ज्यां बरसे ठंडो पाणी रे । घनों हिये ने हरसावे म्हारे मारवाड़ री वाणी रे । आ बोली इतरी है मीठी ज्यां घोली है शक्कर अरे ज्यां घोली है शक्कर चीर काळजो दिल में उतरे इन री नहीं है टक्कर अरे इन री नहीं है टक्कर बोल बोल कर घनी में देखी पण आ भाषा री महारानी रे   ....... मनडे रे तपते धोरा माई बरसे ठंडो पाणी रे (2) सुनु तो बचपन आ ज्यावै है म्हारी आंख्या सामा अरे म्हारी आंख्या सामा अरे दादी घरां पाडती काजल गावंती हाथे पगे दामा हाथे पगे दामा एक साबन की बट्टी से ही घर का सब न्याह लेता घर का सब न्याह लेता चूर छाछ राबड़ी में मैं ठंडी रोटी खा लेता ठंडी रोटी खा लेता  काचर बोर मतीरा खाता फलयां तोड़ता काची  बिछा खाट सो ज्याता छत पर नींद आवंती साची  याद घणे रो आवे म्हाने म्हारा खेत म्हारी ढाणी रे मनडे रे तपते धोरां माई बरसे ठंडो पाणी .. (3) पिवरिये री ओलयूं आवे कद आवेला बीरो कद आवेलो बीरो तने जिमाऊ घी को चूरमो रान्धु गुड़ को सीरो रांधयों गुड़ को सीरो फुलड़ा चुगस्यन गीत गावस्य पूजास्यां गंवर ईशर की जोड़ी कह दीज्यो म्हारी ससुडी ने अबकी आऊँ ला मोड़ी याद मावड़ी की आव...

पर चूक गए

बरसात भी थी  सैलाब भी था पर जाने क्यों दरिया  सुख गए । प्यास भी थी  और बूंदें भी  बस पीनी थी पर चूक गए गम भी था  चोटें भी थी और तेरा कांधा भी  बस रखकर सर मुझको रोना था  पर चूक गए अब तो खर्च हो गई सांसे  जीवन जो मिला था हमको वो जीना था  पर चूक गए । प्यास भी थी  और बूंदें भी  बस पीनी थी पर चूक गए दिल की बातें  इक दूजे को कुछ कहते हम कुछ कहते तुम होठों तक आई थी बातें वो कहनी थी पर चूक गए । प्यास भी थी  और बूंदें भी  बस पीनी थी पर चूक गए एक अचानक झोंका आया थोड़ा घूंघट भी था सरकाया करना था दीदार तुम्हारा पर चूक गए । मीना था और साक़ी भी थे पीनी थी आंखों की मदिरा पर चूक गए प्यास भी थी  और बूंदें भी  बस पीनी थी पर चूक गए जीवन मांग के फिर लाएंगे सांसे तुमको लौटाएंगे जी लेना जितना जीना है  अबकी फिर मत कहना के  लो फिर से हम तो चूक गए प्यास भी थी  और बूंदें भी  बस पीनी थी पर चूक गए

चुनाव के बाद

दिखती  नहीं गरीबों की पीड़ चुनाव के बाद , ये आम जनता लगती है भीड़ चुनाव के बाद, बंगला  मिला है  जब से मंत्री जी को तो अब भाती नहीं खपरैल की ये नीड़ चुनाव के बाद ।। अब  बसते नहीं  मज़दूर सीने में चुनाव के बाद, बदबू आने लगी है अब पसीने में चुनाव के बाद, सजी रहती है मंचों पर बिसलरी की बोतलें हिचकते हैं लोटे का पानी पीने में चुनाव के बाद ।। ज़हर वो किसानों को पीने नहीं देंगें चुनाव के बाद, वादा था गरीबी  में यूँ जीने नहीं देंगें चुनाव के बाद, बाढ़ में बहे मकान हेलीकॉप्टर से देखने निकले हैं कहते थे छत तुम्हारी चूने  नहीं देंगें चुनाव के बाद ।।

ये भी तो हिंसा है

महकते चहकते  और लता की  कोरों पर लहकते  उपवन की शोभा बढ़ाते हैं ये पुष्प हर दिशा खुशबू फैलाते च्यक्षुओं को सहलाते हैं ये पुष्प । भ्रमर का प्रेम यही है यही तितलियों का यौवन है मधु मक्षिका करती  जिनका सदा रसपान । ये जीवित अंग है प्रकृति का  इनका सदा करो सम्मान  कुछ टूट कर झरे पुष्प किसी के पैरों में न रौंदे जाएं उन्हें पहुंचा दें यदि  योथिचित स्थान  तब तक तो ठीक है , मगर स्पंदित आनंदित  प्रस्फुटित पल्लवित पुष्पों को तोड़कर तुम लताओं से नोचकर तुम हथेलियों में दबोचकर तुम क्या नहीं कर देते हो वध इनका मां समान डालियों की गोद में खेलते  पिता समान तने के कांधे पर इठलाते इन नन्हे पुष्पों को अलग कर देते हो उनसे  कभी कभी ये मूक जानवर की  बलि जैसा लगता है मुझको देवताओं के चरणों में  कर देते अर्पित तो कभी लगा देते हो गुलदान में और अगले दिन फैंक देते हो किसी कूड़ेदान में कभी हार बनाकर  किसी गले का  कर देते नष्ट जीवन उनका कभी स्वागत द्वार पर बिंध कर नुकीले तारों से तो कभी मुंडेर पर लटका देते कभी चौखट पर झूला देते  इसीलिए नहीं...