कोख में
कोई कोख में क्यों न मारे लड़कियों को तुम्हारे देश में यहां भेड़िए घूमते रहते हो पुरुषों के भेष में
शब्द ताकत बड़ी हुए मत न जोर से न बोल बारिश में फसलां उगे नहीं बाढ़ को मोल सोच में रखो लोच तो जिंदगी में लोचा कम होगा । लेखक एक राष्ट्रवादी कवि है ।