दोहे

घड़ी बंद जो कोई करे
समय बंद नहीं होय
झूठ छिपाया झुठ छिपे
सत्य का अंत न होय

सूरज जो बादल छिपे
कुछ पल को उजाला खोय
कह नायाब बादल हटे
देख अंधेरा रोय

जड़ ना बदले पेड़ की
बदले पत्ती फूल
जो जड़ को हानी करे
मिट जावे वो मूल

मनोज नायाब


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