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दीवाली

असुरों से ये त्रस्त जगत की  करुण व्यथा दीवाली है । अंधेरों से संघर्षों की  एक अद्भुत प्रथा दीवाली है । चहुं ओर निराशा के घेरे थे वहां रक्त पिपासु के डेरे थे बुझे पड़े सब हवन कुंड  तब फैल गए  दुष्टों के झुंड जब लांघ गई पीड़ा सीमाएं तब आमजनों का वानर सेना  बनने की कथा दीवाली है । नेत्रों में अश्रु के थे झरने  फिर भी सबकी पीड़ा हरने जंगल बीहड़ दुनियां नापी आदर्शों से नहीं डिगे कदापि सिया राम के उस बिछोह की उस नैतिकता के मूल्यों की  एक प्रेम कथा दीवाली है । अंधेरों से संघर्षों की  एक अद्भुत प्रथा दीवाली है ।

बटेंगे तो कटेंगें

सभी सनातनी बस यही बात रटेगें जातियों में बंटेंगे तो फिर हम कटेंगें  जातियों में छंटेगें तो आपस में बंटेंगे  आपस में बंटेंगे तो गिनती में घटेंगे  अब तो संभल जाओ मेरे सनातनियों गिनती में घटेंगे तो फिर सारे कटेंगें  बंटेंगे तो कटेंगे - बंटेंगे तो कटेंगे । हमला हो रहा रोज़ तुम पर चहुं ओर हिंदुओं के भेष में है कितने हरामखोर कब तक सहोगे क्यों नही मचाते शोर आंख में अंगार भर पोंछ आंसुओं की कोर अब नहीं लुटेंगें अब नहीं पिटेंगे धर्म बचाने हम मिलकर डटेंगें कटेंगें तो बटेंगे कटेंगें तो बटेंगे  ताकत में हम ही सबसे बड़े थे राजा राजवाड़े सभी आपस में लड़े थे तुमसे हूँ बलशाली इसी बात पर अड़े थे मौके की तलाश में सारे दुश्मन खड़े थे चाहे हो मराठा तुम चाहे राजपूत हो सारे के सारे तो माँ भारती के सूत हो चहुं ओर देखो ये शिकारी बड़े आए हैं तुमको फंसाने कैसे जाल बिछाएं है   पहले जैसी भूल अब फिर नहीं करेंगे  अब नहीं लुटेंगें अब नहीं पिटेंगे बटेंगे तो कटेंगें बटेंगे तो कटेंगें  ये जॉर्ज सोरोश की दत्तक औलाद हैं  कहो उनसे हम सनातनी फौलाद है वो जो घुसपैठियों से रखती ममताएँ ...

नशा खुरानी

कोई  फर्क नहीं  तुम मेष  मकर या मीन हो कभी मीठा कभी कसेला कभी नमकीन हो जहां भी जाओगी कयामत ढहाओगी  अमरीका जापान या फिर चीन हो  नशा खुरानी तो पेशा है तुम्हारा  तुम दिल लूट ने की शौकीन हो हाए कहीं पुलिस का छापा न पड़ जाए  तुम तो चलती फिरती कोकीन हो तुम हँसती हो तो केल्शियम जैसी हो और मुस्कुराती हो तो प्रोटीन हो

ये किताबें मेरे काम की नहीं

ये किताबें मेरे काम की नहीं-- कितनी किताबें पढ़ ली  मैंने तुम्हारी नायाब उसमें आकाश छूने की तरकीबें थी हिमालय की गहराइयों का ज़िक्र भी था सोना चांदी  फूल तितलियां  5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था सेंसेक्स की उछाल सौंदर्य चित्रण प्रेम प्रसंग सब थे उसमें कागज़ की क्वालिटी शानदार है कवर पेज भी आकर्षक है बहुत अच्छा लिखते हो तुम  एक बात कहूँ  बुरा नहीं मानना ये सब भरे पेट वालों के काम की है क्षमा करना  इन्हें लौटाना चाहता हूं ये किताबें मेरे काम की नहीं कोई ऐसी किताब भी  लिखी हो तो देना  जिसमें मेरे बच्चों की  भूख मिटाने की  स्कूल की फीस भरने की  बिटिया के ब्याह का  कर्ज लौटाने की टूटी दीवार पर प्लास्टर करवाने की तरकीब लिखी हो  फिर चाहे उसमें  मीटर अलंकार काफिया यति गति व्याकरण  न हो तो भी मेरे लिए अनमोल होगी ।  तुम्हारी उठ बैठ तो  नामचीन कवियों -शायरों से है पूछो न उन्होंने लिखी हो कोई ऐसी किताब  तो मुहैया करवाना ना ।

चलो लोकतंत्र बचाएं

नायाब -- झोले भर पत्थर कनस्तर भर पेट्रोल बोतल में केरोसिन नफरत की चासनी में लिपटे कुछ आज़ादी के नारे किसी धर्म विशेष को खास विशेषण से लिखी नारों की तख्तियां कुछ किराए के शांति दूत कुछ बरगलाए मासूम बच्चे कुछ बहके नौजवान साथ ही दूसरों की धुन पर बजाने को डफली कुछ ज़हर बुझी कलम लाल स्याही वाले कलमकार  यह सब समान तैयार है । अब देर किस बात की चलो लोकतंत्र को बचाने निकले । मनोज  " नायाब "

तुम्हे क्या पता

पीकर सच बोलना यही तो हमारा काम है तुम्हे क्या पता सदियों  से चल रहा सिलसिला ये आम है तुम्हे क्या पता बिन पिये ही नफरत करने वालों  ये शराब किस शह का नाम है तुम्हे क्या पता कंक्रीट के शहर में रहने वालों गांवों में कितनी हसीन शाम है तुम्हे क्या पता जो नहीं मिला पता तो फाड़ दिया खत ए डाकिए इसमें किसी का पैगाम है तुम्हे क्या पता बंदगी तुम्हें जिसकी भी करनी है करो मगर इस मुल्क के आका बस राम है तुम्हे क्या पता संभालना तुम्ही से खरीद लेंगें तुमको  इनकी जेबों में होते बड़े दाम है तुम्हे क्या पता 

(लेख ) क्या है खुशी

क्या है ये ख़ुशी और ग़म-: ख़ुशी हो या ग़म भले ही भीतरी एहसास हो पर दोनों 5 इन्द्रियों से प्रभावित होती है और ये इन्द्रियां बाहरी वस्तुओं से , अतः इनका प्रभाव भी अलग अलग मात्रा में पड़ना लाजिमी है । हालांकि ख़ुशी और गम का को नापने का कोई पैमाना तो नहीं है पर इन सबके बावजूद उनके कद काठी और स्तर को नापा जाता रहा है अप्राप्य और अनुपलब्ध पैमानों से मसलन आपका बच्चा अपनी कक्षा में उत्तीर्ण होता है तो आपको ख़ुशी होती है और वही प्रथम श्रेणी के अंकों से उत्तीर्ण हो तो ख़ुशी और बढ़ जाती है और इससे भी आगे बढे और पुरे विद्यालय में सर्वश्रेष्ठ आये तो आपकी ख़ुशी का पैमाना किस स्तर तक होगा इसका अन्दाज़ा आप सहज ही लगा सकते है वहीँ एक ख़ुशी ऐसी भी हो सकती है न तो बाहरी दृश्यों से मिलती है न ही किन्हीं इन्द्रियों से प्राप्त होती है ये ख़ुशी या ग़म आपको एहसास या कल्पना के सागर में प्रवेश करने से भी मिलती है ये भीतरी चीज़ों से मिलती है मगर ये वास्तविक कम और काल्पनिक ज्यादा होती है मगर जो भी हो ख़ुशी का एहसास तो कराती ही है । इसलिए ये मेरी निजी राय है की हर गम और ख़ुशी की एहसास का अपना एक स्तर होता है ये जब ये स्तर बढ़ता है ...