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Tum gaye to chand kuch aisa tha

तुम गए तो चांद कुछ कुछ यूं ही लगा मुझे वादों के घड़े पर तांबे की पुरानी तश्तरी सा घिसा घिसा सा था । अधूरी नींद काटी हुई खुली आंखों से छुआ ज्यों लिस लिसा सा था । आधा चांद किसी ने इश्क के सिलबट्टे पर कूटकर मानो सितारे बना लिए और किसी की ज़ुल्फ़ों में टांक दिए बचा आधा चांद दो पाटों में पिसा पिसा सा था । रोज़ जो उभरा सा रहता है खुशी से आसमा के माथे पर चांद आज धंसा धंसा सा था । तुम गए तो चांद कुछ कुछ यूं ही लगा मुझे । सचमुच तुम गए तो चांद कुछ कुछ यूं ही लगा मुझे । मनोज " नायाब "

तिलमिलाने की tilmilane ki #ghazal

नहीं चाहिए इज़ाज़त सितारों को झिलमिलाने की । इनकी तो तासीर ही है हमेशा यूं खिलखिलाने की । आपके होठों पर भी तिल हमारे होठों पर भी तिल । लो आपको इज़ाज़त देते हैं आज तिलमिलाने की । तूं मैं और तन्हाई बस इतना भर काफी है नायाब, नहीं होती कोई रुत कभी दिल से दिल मिलाने की । तुम्हारी भी आदत कुछ कुछ ऐसी है सनम । यूं Gdp की तरह हर रोज़ बदल जाने की । कोई घड़ी और हद तय नहीं है न हो पाएगी कभी । रुपया, सेंसेक्स और तुम्हारे ज़ुल्फ़ों के गिर जाने की । " मनोज नायाब "

# धारा 370 #article 370#

" Article 370 " 1. दो शेरों की इस जोड़ी ने महज़ 370 को नहीं हटाया है । मां भारती के घायल मस्तक पर मरहम आज लगाया है । 2. काश्मीर पर जिस बंदे ने भी बुरी नज़र उठाई है । धरती पर अब उस बंदे की अन्तिम आज विदाई है । 4. डल झील पर जाकर अबकी छठ पूजा भी मनाएंगे । बहुत बो चुके ज्वार बाजरा अब सेवों के बाग लगाएंगे । 3. लाल किले से लाल चौक तक फहराएगा अपना झंडा उन गद्दारों से कह दो चाहे कर लो तुम जितना दंगा । 5 जयचंदों के शीश काटकर विधवाओं को सौंपे जाएंगे माँ भारती के घायल मस्तक पर मरहम तभी लगाएंगे...... 6 ए कश्मीर के वासी सुनलो हम ही तेरे अपने थे । मक्कारों को पहचानो जो दिखलाते झूठे सपने थे । 7 खुद के बच्चे पढ़ते है वो लंदन की स्कूलों में और झूलते हैं वो झूला चांदी के उन झूलों में । 8 आई नहीं शर्म ज़रा भी, नहीं आई उन्हें लाज रे । बना दिया तेरे मासूमों को  दिहाड़ी पत्थरबाज रे । 9 शेरों ने जंगल से एक एक गीदड़ मार भगाया है । मां भारती के घायल मस्तक पर मरहम आज लगाया है । 10 सरकारी पैसों से भर लेते थे जो अपनी संदूकों को । और तेरे बच्चों के बस्तों से बांध दिया बंदूकों को...

पिता #pita# FATHER

पिता पर कविता जिससे खुशहाल घर का कोना कोना है बड़ा मुश्किल दुनियाँ में पिता होना है । मुश्किलों में भी जिसको नहीं रोना है । बड़ा मुश्किल दुनियाँ में पिता होना है । थककर सवार हो जाते थे उसके कंधों पर नींद जो लगे तो पेट उसका बिछौना है । बड़ा मुश्किल दुनियाँ में पिता होना है निराशा के बाद भी चेहरे पे हंसी संजोना है बड़ा मुश्किल दुनियां में पिता होना है तुम तो बस ज़िद पे आ जाते हो कई बार कर्ज करके भी बच्चों की ख्वाहिशों का पूरा होना है बड़ा मुश्किल दुनियां में पिता होना है । कैसा पत्थर सा दिल बनाया ईश्वर ने इसका खुद के लिए कोई ख्वाब नहीं संजोना है  । बड़ा मुश्किल दुनियां में पिता होना है । ये बच्चे क्या जानते है कहाँ से आती है रोटी तिल तिल कर खून का पसीना होना है बड़ा मुश्किल दुनियां में पिता होना है घर पर उजाला रहता है कैसे तुम क्या जानों बाती की तरह जल जल कर राख होना है बड़ा मुश्किल दुनियां में पिता होना है । साहूकारों के एहसान तले है दबा जिसकी पगड़ी का कोना कोना है बड़ा मुश्किल दुनियां में पिता होना है । तुम जो दावत उड़ाए हो उसकी बिटिया की शादी में गिरवी उस प...

सफ़हे खोलती

सफ़हे खोलती पढ़ती सिसकती और रात भर जाग कर थक हार कर सो जाती । मेरी ज़िंदगी की दराज़ तुम्हारे खतों के बगैर मानो बेवा सी हो जाती । तुम नहीं भी हो तो भी तुम्हारे भेजे खत मंगलसूत्र के जैसे थे मानो किसी सिपाही की जंग से कोई खबर नहीं आयी हो फिर रोज़ाना उस मंगलसूत्र को चूमकर उसके आमद का इंतज़ार करती । तेरी याद जैसे खतों की बंजर ज़मी पर हर्फ़ों के बीज बो जाती । सफ़हे खोलती पढ़ती सिसकती रात रात भर जाग कर थक हार कर सो जाती ।

ये परिवार एक नदी

आप बिताएं हमारे संग भरी पूरी खुशहाल सदी । देहरी नहीं लांघ पाएगा संकट भूले से आ भी जाए यदि । आप मज़बूत किनारा ये परिवार एक नदी । आप है तो खुशियां है, आप है तो रौनकें हैं, आप है तो त्योंहार अच्छे लगते हैं, आप है तो संस्कार है, आप है तो तो ये परिवार है, आप है तो खिलखिलाता संसार है । आप मंत्रों की सी ताकत हो आप दोहों की सी प्रेरणा हो आप ग़ज़लों सी मस्ती हो आप भजनों की भक्ति हो आप है तो बहुएं बेटी है आप है तो मुसीबतें नींद में लेटी है । ये आपका जन्मदिन नहीं त्योंहार है । आपसे कायम सब अपनों में प्यार है ।

पहचान छीन ली #pehchaan cheen li

बारिशों में आया करती थी खुशबू मिट्टी की तुम्हारे इन संगेमरमर के पत्थरों ने मेरे कच्चे आंगन की पहचान छीन ली । बस चटाई पर पड़ते ही सो जाया करते थे मगर तुम्हारे टेलीविज़न ने बच्चों से खो खो कबड्डी की थकान छीन ली । जहां तनख्वाह से ज्यादा उधार मिलता था मगर तुम्हारी निर्मम शॉपिंग मॉल ने मेरे मोहल्ले की सब दुकान छीन ली । हर दीवाली ओ रमज़ान में घुलती थी मिठास मगर तुम्हारे पिज़्ज़ा ओ बर्गर ने मेरे गुड़ के सकरपारों की मिठास छीन ली । मनोज नायाब