मेरा गांव

नायाब --
मेरा गाँव/ मनोज नायाब
ये जो मेरा गाँव है
चिलचिलाती धूप में
एक ठंडी सी छांव है
रहने दो कुछ दिन 
कारोबार की बातें
अब तो बस यहां की 
मिट्टी और मेरे पांव है ।

Comments