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Showing posts from February, 2016

कुछ दिन और रुक जाती बिटिया

कुछ दिन तो और रुक जाती बिटिया अभी तो जी भरा नहीं है । तू गई तो मानो सब खो गया तुमसा तो सोना भी खरा नहीं है । तेरे कमरे की अलमारी हमसे पूछेगी बिटिया वो कहाँ गई जो बड़े जतन से अपने कपड़े सहेज कर यहाँ रखती थी आजकल दिखाई नहीं पड़ती तो क्या जवाब देंगे तुम ही बताती जाना तुम्हारे कमरे का वो आईना उदास होकर पूछेगा कहाँ है वो जो घंटों घंटों मेरे सामने  सजती संवरती थी तो क्या जवाब देंगे हम तुम ही बताती जाना गुड़िया डाइनिंग टेबल से लगी तेरी वो चेयर  क्या अब हमेशा खाली रहेगी वो कुछ पूछेगी तो क्या कहेंगे हम तुम ही बताती जाना लाडो अब आइस क्रीम खाकर बीमार पड़ोगी तो कौन डाँटेगा तुम्ही बताती जाना  अब bday पर रात 12 बजे केक कौन काटेगा तुम्ही बताती जाना बिटिया अब किससे करूँ वो पिलो फाइटिंग कौन दिखाएगा मम्मी को  मेरी गन्दी सी हैंडराइटिंग दीदी अब टीवी का रिमोट किससे  छिपाऊँगा छुप कर तेरे हिस्से की चोकलेट कैसे खाऊंगा बताओ तुम ही यूँ झटके में सुना कर जाता है  क्या घर का आँगन कोई यूँ अचानक चिड़िया की तरह छोड़कर घोंसला उड़ जाता...

कुछ दिन और रुक जाती बिटिया

कुछ दिन तो और रुक जाती बिटिया अभी तो जी भरा नहीं है । तू गई तो मानो सब खो गया तुमसा तो सोना भी खरा नहीं है । तेरे कमरे की अलमारी हमसे पूछेगी बिटिया वो कहाँ गई जो बड़े जतन से अपने क...